मुम्बई में महिला पत्रकार के साथ हुए गैंग रेप हादसे के बाद कुछ नेताओं ने कहा, महिलाओं को कपड़े पहनने के मामले में थोड़ा सा विचार करना चाहिए। यकीनन यह बयान महिलाओं की आजादी छीनने सा है। अगर दूसरे पहलू से सोचें तो इसमें बुरा भी कुछ नहीं, अगर थोड़ी सी सावधानी, किसी बुरी आफत से बचा सकती है तो बुराई कुछ भी नहीं। हमारे पास आज दो सौ किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ने वाले वाहन हैं, लेकिन अगर हर कोई इस सपीड पर कार चलाएगा तो हादसे होने संभव है। ऐसे में अगर कोई गाड़ी संभलकर चलाने की बात कहे तो बुरा नहीं मानना चाहिए। देश का ट्रैफिक, सड़कें भी देखनी होगी, केवल स्पीड देखने भर से काम तो नहीं हो सकता। ऐसी सलाह देश के कुछ नागरिकों को बेहद नागवार गुजरती है, लेकिन आग के शहर में मोम के कपड़े पहनना भी बेवकूफी से कम न होगा। हमें कहीं न कहीं समाज को देखना होगा, उसके नजरिये को समझना होगा। जब हर कदम पर सलीब हो, और हर तरफ अंधेरा फैला हो, तो यकीनन हर कदम टिकाते समय बहुत सावधानी बरतनी पड़ेगी, पहले टोह लगानी पड़ेगी है, नीचे सलीब तो नहीं, एक दम दौड़कर निकलने वाले अक्सर लहू लहान होते हैं। देश की सरका...
सुन्दर!!
जवाब देंहटाएंजैक एंड जिलवा वैंट अप द हिलवा, पनिया भरन के वास्ते वाले स्टाइल में...
जवाब देंहटाएंमेरा पतंगवा, गया हाई राइस असमनवा,
दूसरों की पतंगिया कटिंग के वास्ते...
जय हिंद...
मस्त लगे
जवाब देंहटाएंहवा में झूमे
देख किसी
परी को घूमे
( परी-स्त्री पतंग)
न घबराए,
जानबुझ जाए
पेचा लगाए
उसके संगवा
मेरा पतंगवा
वाह बेटा तुम्हारा पतंगवा तो कमाल का ऊड रहा है । सुन्दर रचना बधाईयाँ
बहुत खूब भाई , ये अन्दाज भी खूब भायी ।
जवाब देंहटाएंbahut sunder
जवाब देंहटाएं