थप्पड़ अच्छे हैं

जोर से थप्पड़ मारने के बाद धमकी देते हुए मां कहती है, आवाज नहीं, आवाज नहीं, तो एक और पड़ेगा। जी हां, मां कुछ इस तरह धमकाती है। फिर देर बाद बच्चा पुराने हादसे पर मिट्टी डालते हुए मां के पास जाता है तो मां कहती है कि तुम ऐसा क्यूं करते हो कि मुझे मारना पड़े। अब मां को कौन समझाए कि मां मैं अभी तो बहुत छोटा हूं या छोटी हूं, तुम कई बसंत देख चुकी हो। तुम भी इन थप्पड़ों को महसूस कर चुकी हो। मेरे पर तो तुम इतिहास दोहरा रही हो या कहूं कि एक विरासत को आगे बढ़ा रही हो। यह थप्पड़ मुझे जो आपने दिए हैं, वो कल मैं भी अपनी संतान को रसीद करूंगा या करूंगी, और मुझे पता भी न होगा, कब मेरा हाथ आपकी नकल करते हुए उसकी गाल पर छप जाएगा। जब मम्मी मारती है तो पड़ोस में खड़े पापा या कोई अन्य व्यक्ति कहता है, क्यूं मारती हो बच्चे को, बच्चे तो जिद्द करते ही हैं, तुम्हें समझने की जरूरत है, मगर मां को नसीहत देने वाला, कुछ समय बाद इस नसीहत की धज्जियां उड़ा रहा होता है। मां बाप के थप्पड़ का दर्द नहीं होता, क्यूंकि उनके पास प्यार की महरम है। हम बच्चे भी तो कितनी जिद्द करते हैं, ऐसे में क्षु...