आज चौथी तारीख है, कुछ जल्द हो जाए
सर जी, आज चौथी तारीख है, कुछ जल्द हो जाए। क्यूं जी? क्या आज पत्नि को डिनर पर लेकर जाना है? नहीं तो, क्या बच्चों को इम्िहतानों की तैयारी करवानी है? नहीं तो, क्या आज मां या बाप को डॉक्टर के यहां चेकअप के लिए लेकर जाना है? नहीं जी, तो आखिर फिर आज ऐसा क्या करना है, जिसके लिए जल्दी छूटी चाहिए, जी आज आइपीएल शुरू होने वाला है, बहुत अच्छा, आइपीएल देखने के लिए जल्दी जाना है, खूब मियां, आज से देश व्यस्त हो जाएगा, और भूल जाएगा, काले धन के मुद़दे को, भूल जाएगा सेनाध्यक्ष की चिट़ठी से हुए खुलासे को, भूल जाएगा देश में बढ़ती कीमतों को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों को। चलो ठीक है, जल्दी चले जाओ। इस ट्रैफिक को भी आज ही रास्ता रोकना था, इतने में साथ खड़ा व्यक्ित कहता है, यार यह तो रोज की समस्या है, शायद आज तुम ही पहले आ गए, यहां तो ट्रैफिक की यही स्थिति है, वैसे घर जाने से पहले ही आइपीएल शुरू हो जाएगा, क्या तुम भी आइपीएल देखोगे, क्या मजाक करते हो, हिन्दुस्तान में रहते हो, और क्रिकेट नहीं देखते तो क्या जीना है, यही तो एक काम है, जो सब चीजों को भुला देता है पत्िन के पीठ दर...