अपराधग्रस्त जीवन या सम्मानजनक जीवन
जिन्दगी में ज्यादा लोग अपराधबोध के कारण आगे नहीं बढ़ पाते, जाने आने में उनसे कोई गलती हो जाती है, और ताउम्र उसका पल्लू न छोड़ते हुए खुद को कोसते रहते हैं, जो उनके अतीत को ही नहीं वर्तमान व भविष्य को भी बिगाड़कर रख देता है, क्योंकि जो वर्तमान है, वह अगले पल में अतीत में विलीन हो जाएगा, और भविष्य जो एक पल आगे था, वह वर्तमान में विलीन हो जाएगा। जिन्दगी को खूबसूरत बनाने के लिए चाणक्य कहते हैं, 'तुमसे कोई गलत कार्य हो गया, उसकी चिंता छोड़ो, सीख लेकर वर्तमान को सही तरीके से जिओ, और भविष्य संवारो।' ऐसा करने से केवल वर्तमान ही नहीं, आपका भविष्य और अतीत दोनों संवरते चले जाएंगे। किसी ने कहा है कि गलतियों के बारे में सोच सोचकर खुद को खत्म कर लेना बहुत बड़ी भूल है, और गलतियों से सीखकर भविष्य को संवार लेना, बहुत बड़ी समझदारी। मगर हम जिस समाज में पले बढ़े हैं, वहां पर किताबी पढ़ाई हम को जीवन जीने के तरीके सिखाने में बेहद निकम्मी पड़ जाती है, हम किताबें सिर्फ इसलिए पढ़ते हैं, ताकि अच्छे अंकों से पास हो जाएं एवं एक अच्छी नौकरी कर सकें। मैं पूछता हूं क्या मानव जीवन केवल आ...