सोनिया गांधी ने मनमोहन सिंह को 'पत्र' लिखा

सोनिया गांधी, संयुक्‍त प्रगतिशील गठबंधन की चेयरपर्सन ने देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखा, लेकिन यह कोई प्रेम पत्र नहीं था। यह पत्र आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्‍ति नागपाल के निलम्‍बन को लेकर लिखा गया, इस पत्र में सोनिया गांधी ने मनमोहन सिंह से आग्रह किया, 'सरकार आईएएस अधिकारी के साथ किसी तरह की नइंसाफी न होने दे, और सरकार ने अब तक इस मामले में क्‍या काईवाई की उसकी जानकारी मांगी।'

जब सोनिया गांधी के पत्र की ख़बर सामने आई तो दिमाग का चक्‍का घूमा। खयाल आया कि आजकल सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह के बीच पति पत्‍नि वाला मनमुटाव हो गया क्‍या ? जैसे टीवी सीरियलों में होता है, जब पति पत्‍नि में अनबन हो जाती है तो टि्वटर नमूना पर्चियों का सहारा लेते हैं एक दूसरे को अपनी बात कहने के लिए, वैसे तो साधारण परिस्‍थितियों में रिमोट होम मिनिस्‍टर के हाथ में ही होता है, होम मिनिस्‍टर कहने भर से काम चल जाएगा, मुझे यकीन है।

सोनिया गांधी, जिन पर अक्‍सर आरोप लगता है कि संप्रग सरकार को मनमोहन सिंह नहीं, स्‍वयं सोनिया गांधी चलाती हैं, शायद वैसे ही जैसे बड़े बड़े अधिकारी कार की पिछली सीट पर बैठकर कार चालक को दिशा बताते हुए गाड़ी चलाते रहने का आदेश देते हैं, लेकिन ऐसा मामला अभी तक सामने नहीं आया, जिसमें कार चालक को किसी मालिकन या मालिक ने चिट पर लिखकर गाड़ी चलाने का आदेश दिया हो। हां, तब ऐसा जरूरत होता है, जब मालिकन या मालिक किसी अन्‍य काम में व्‍यस्‍त हों, और ड्राइवर को किसी जगह भेजना हो।

ऐसे में सवाल उठता है कि सोनिया गांधी आजकल कहां व्‍यस्‍त हैं, और मनमोहन सिंह, जोकि देश के प्रधानमंत्री हैं, को अकेले छोड़ दिया, जब लोक सभा चुनाव सिर पर हैं, और विरोधी पार्टियां दुष्‍प्रचार के लिए छोटे छोटे बहाने ढूंढ रही हैं। राहुल गांधी भी लापता हैं। ऐसे में तार से काम चलाया जा रहा है। दुर्गा शक्‍ति की गूंज जब टेलीविजन वालों ने पूरे देश में फैला दी, तब सोनिया गांधी की आंख खुली, शायद गलती से कोई न्‍यज चैनल रिमोट दबाते दबाते चल गया होगा, या दरवाजे के नीचे से कटिंग रहित समाचार पत्र पहुंच गया होगा।

चलो अच्‍छा है। सोनिया गांधी को इस बहाने लिखने का मौका तो मिला। चाहे मनमोहन सिंह को निर्देशित करता पत्र ही सही, मीडिया वाले अब रिमोट भूल पत्र संचालित प्रधानमंत्री कह सकते हैं। अगर सोनिया गांधी ने ऐसे कदम पहले उठा लिए होते तो शायद पिछले महीने बंद होने वाली टेलीग्राम सेवा बच जाती। देशभर में 14 जुलाई रात 9 बजे से 160 साल पुरानी टेलीग्राम  सेवा बंद हो गई।

सोनिया गांधी ने पत्र लिखा तो सबसे बड़ा दुख समाजवादी पार्टी को हुआ, जो केवल नाम से समाजवादी है, चरित्र से पूरी समझौतावादी। सोनिया गांधी तो अच्‍छी तरह जानती हैं। मामला कोई भी हो, समाजवादी पार्टी का एक ही नारा रहता है, हमारा काम करोगे तो समर्थन मिलेगा, वरना आपका हर बिल जन विरोधी होता है।

सीबीआई की दुर्दशा के पीछे जितनी कांग्रेस सरकार जिम्‍मेदार है, उससे कई गुना तो समाजवादी पार्टी जिम्‍मेदार है, जो संप्रग सरकार पर दबाव बनाकर, सीबीआई की गरिमा को चोटिल कर देती है। सुनने में आया है कि सीबीआई मुलायम सिंह पर लगे हैसियत से ज्‍यादा संपत्‍ति बनाने के मामले में चार बार आगे पीछे हो चुकी है। अब फिर चुनाव सिर पर हैं, अब फिर बैकफुट पर जाने की तैयारी है। सीबीआई वाला मामला तो ठीक है, लेकिन सोनिया गांधी के पत्र पर पहली प्रतिक्रिया इस पार्टी की आई, और समाजवादी पार्टी के नेता नरेश कुमार अग्रवाल ने सोनिया गांधी को दो पत्र और लिखने की सिफारिश की है, लेकिन यह पत्र दुर्गाशक्‍ति नागपाल निलम्‍बन के संबंध में नहीं, बल्‍कि आईएएस खेमका व राजस्‍थान के दो अधिकारियों के साथ हुई नइंसाफी के लिए। वहीं, भाजपा की मीनाक्षी लेखी ने कहा, ‘अगर सोनिया गांधी को दुर्गा नागपाल के निलंबन की इतनी चिंता है, तो उन्हें आईएएस अधिकारी अशोक खेमका के मामले पर भी गौर करना चाहिए, जिसका राबर्ट वाड्रा के भूमि सौदे की जांच करने पर तबादला किया गया।’  खेमका का तो 44 बार तबादला किया जा चुका है।  

सोनिया गांधी ने पत्र पर उठते हुए सवालों और विवादों को देखते हुए रविवार, 4 अगस्‍त 2013 को प्रण तो किया होगा कि अपने रिमोट में सैल डाल दिए जाएं तो अच्‍छा होगा, वरना इस बार की तरह घर की बात हर बात बाहर चली जाएगी।

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