इससे बड़ी दुर्घटना क्या होगी?
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लेखक कुलवंत हैप्पी |
पिछले दिनों बीबीसी की हिन्दी वेबसाईट पर रेणु अगाल का भूटान डायरी सिरलेख से लिखा एक लेख पढ़कर इसलिए अच्छा लगा क्योंकि उन्होंने अपने लेख के मार्फत दुनिया के विकासशील देशों को आईना दिखाने की कोशिश की, जो आर्थिक मजबूती की होड़ में अपने असली धन (प्रकृति) को बर्बाद किए जा रहे हैं।
बीबीसी संवाददाता रेणु अगाल लिखती हैं कि दक्षिण एशिया के ज़्यादातर देशों में अभी तापमान ने कीर्तिमान खड़ा कर रखा है, ऐसे में पहाड़ों से घिरे खुशनुमा मौसम का लुत्फ़ ही अलग है, और भूटान के माहौल का मज़ा सभी अतिथि उठाते दिख रहे है। यहाँ अपने पारंपरिक कपड़ों, पुराने डिजाइन की लकड़ी पर साज सज्जा कर बनाए मकान सभी सहेज के रखे गए हैं। यहाँ तक की सरकार अपनी देश की पहचान बनाए रखने और अपने संस्कृति को बचाने के लिए ज्यादा पर्यटकों को भी नहीं आने देती। हर सैलानी को दो सौ डॉलर रोज़ देने पड़ते है यानि दुनिया का सबसे महंगा पर्यटक स्थल आप भूटान को कह सकते है। यहाँ तक की पड़ोसी नेपाल से आने वाले लोगों को भी यहाँ ज्यादा पसंद नहीं किया जाता, पर भारतीयों को न तो यहाँ डॉलर देने पड़ते है और न ही उन्हें वैमनस्य से लोग देखते है।
थोड़े की ज़रूरत है...
यहाँ की सरकार का फ़लसफा थोड़ा अलग है. थोड़ा है, थोडे की ज़रूरत है और थोड़ा ही काफ़ी है। भूटान सरकार सीमित संख्या में पर्यटकों को आने देती है। सोच के देखिए कि अगर आपका नज़रिया ऐसा हो जाए तो न आप पैसे के पीछे भागेंगे, न आप जीवन की दौड़ में किसी को मात देने में व्यस्त होंगे। आप कमाएँगे और मौज करेंगे। न ब्लड प्रेशर, न दिल का दौरा, बस होठों पर मुस्कान और गुलाबी गाल। ऐसे जीवन का मजा लेने के लिए ही सही आप भूटान आ सकते हैं और अगर नहीं तो अगली बार जिन्दगी की मार धाड़ में जुटने के पहले सोचिएगा क्या वाकई यह सब जरूरी है।
Qudratke niyamon ko todte aadmee,
जवाब देंहटाएंHartaraf daudte haanpte aadmee...
Behad achha pesh kiya hai apne khayalaat ko..
अष्टवक्र ने ठीक ही कहा है :- जो है सो है .......में ही जीवन का शाश्वत आनंद है।
जवाब देंहटाएंachha hai
जवाब देंहटाएंठंडक देती जानकारी।
जवाब देंहटाएंबहुत अच्छी लगी यह जानकारी...
जवाब देंहटाएंअच्छी जानकारी...
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