एक ब्लॉगर कहत सब लेखक होए

एक ब्लॉगर कहत सब लेखक होए।
और ब्लॉगर पाठक बचा न कोए।।

तब मोहे मुंह से कुछ ऐसे वचन होए।
पाठक ही पाठक यहां, बस तुम ही सोए॥

तुम न जावत घर किसी के
तो तोरे घर कौन आए।

माना तुम उच्चकोटि के
घमुंडवा तो किसी न भाए॥

अपने घरीं सब राजा, रंक न कोए।
सब जावत वहीं, जहां इज्जत होए॥

टिप्पणी नहीं आई तो का हुआ।
पसंद नहीं चटकाई तो का हुआ॥

वो दर हमार आए तो सही।
ले कर प्यार आए तो सही॥

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