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सदन में जो हुआ, उसे रमेश बिधूड़ी के बिगड़े बोल तक सीमित न करें

सांसद रमेश बिधूड़ी के बोल बिगड़े कहकर मामले में इतना सतही मत कीजिये। सांसद रमेश बिधूड़ी ने सांसद दानिश अली को संबोधित करते हुए सदन के भीतर जो कुछ भी कहा, सबसे पहले तो उसको संसदीय रिकॉर्ड से हटाया नहीं जाना चाहिए। साथ ही, उसे जस का तस स्वीकार किया जाना चाहिए। तैश हो या नशा दोनों एक समान है। दोनों ही व्यक्ति के असली चरित्र को बाहर लाते हैं। वीडियो में साफ नजर आ रहा है कि रमेश बिधूड़ी दोनों ही अवस्थाओं में हैं – एक तैश और दूसरा सत्ता का नशा।  मैं तो कहूंगा कि सांसद रमेश बिधूड़ी का स्वागत करना चाहिए। सांसद रमेश बिधूड़ी को जस का तस स्वीकार किया जाना चाहिए क्योंकि हम तो रोजमर्रा की जिंदगी कहते हैं कि, मैं जैसा व्यक्ति हूं वैसा ही मुझे स्वीकार करो। मुझे फेक लोगों से नफरत है। अब जब सदन में रमेश बिधूड़ी ने फेक लिबास उतार फेंका तो आपको बुरा लग रहा है। सांसद रमेश बिधूड़ी से मुंह फेरना सत्य की ओर पीठ करने के समान होगा क्योंकि आप सत्य से मुंह फेर रहे हैं, जो रमेश बिधूड़ी ने बोला वो सत्य है या नहीं जांच का विषय है, पर, जो रमेश बिधूड़ी नजर आ रहे हैं, वो सोलह आने खरा सत्य है, उसको झूठलाया नहीं जा ...

यदि ऐसा है तो गुजरात में अब की बार भी कमल ही खिलेगा!

गुजरात विधान चुनाव के पहले चरण के मतदान में गिनती के 9 दिन बचे हैं। दूसरे चरण के मतदान के लिए 14 दिन, भले ही 3 साल बीतने के बाद भी देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी विकास की मुंह दिखाई न कर सके हों, लेकिन, 18 दिसंबर 2017 को 'गुजरात का किंग कौन' के रहस्य से पर्दा उठ जाएगा, जिसको लेकर इस समय गुजरात में राजनीतिक पारा अपनी चरम सीमा पर पहुंच चुका है। हाल ही में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने एक रैली में संबोधित करते हुए कहा था कि 151 गिन लो। यह वो ही आंकड़ा है, जो सोमनाथ में इस साल के आरंभ में आयोजित भाजपा प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में तय हुआ था, बस फर्क इतना है​ कि उस समय केवल 150 से अधिक सीटों का संकल्प कहा गया था। लेकिन, आज से कुछ महीने पहले, जब जीएसटी लागू नहीं हुआ था, तब एक बड़े पद की जिम्मेदारी संभाल रहे भाजपा नेता से मैंने व्यक्तिगत स्तर पर बात की थी, और पूछा था कि इस बार गुजरात चुनाव में जनता का रूझान क्या है? उनका कहना था कि 80 सीट तो हाथ में हैं। उनका मतलब साफ था कि 119 सीटों के साथ सत्ता में बैठी भाजपा के लिए डगर आसान नहीं है। संसदीय समिति के सामने पेश...

जय शाह के कारोबार पर द वायर की रिपोर्ट से केंद्र सरकार को क्यों लगा करंट?

हाल ही में द वायर ने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय अमितभाई शाह की कंपनी के टर्नओवर को लेकर सनसनीखेज खुलासा किया। पत्रकार रोहिणी सिंह ने रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के दस्तावेजों का हवाला देते हुए द वायर के लिए सनसनीखेज स्टोरी करते हुए लिखा कि मोदी सरकार आने के बाद 16000 गुना बढ़ा अमित शाह के बेटे की कंपनी का टर्नओवर। रोहिणी सिंह ने ही 2011 में इकनॉमिक टाइम्स में रॉबर्ट वाड्रा के कारोबार का सनसनीखेज खुलासा किया था। इस खुलासे ने कांग्रेस की नोका डुबाने में अहम भूमिका निभायी थी। याद ही होगा कि 2014 में लोक सभा चुनावों का प्रचार करते हुए नरेंद्र मोदी ने रॉबर्ट वाड्रा का हवाला देते हुए कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा था। उस समय रोहिणी सिंह की स्टोरी भाजपा को बड़ी स्वादिष्ट लग रही थी और बीजेपी की तरह कांग्रेस भी रॉबर्ट वाड्रा के बचाव में उतरी थी। और भाजपा सरकार ने अपने रेल मंत्री पीयूष गोयल को जय शाह के बचाव में उतारकर कांग्रेस की बराबरी करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी। इस मामले में हैरानीजनक बात तो यह है कि जय शाह मानहानि का केस अहमदाबाद में ठोकते हैं, और उस...

गुजरात में भाजपा की स्थिति ख़राब, मीडिया को भी बदलने पड़ रहे हैं तेवर

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शुक्रवार को एनडीटीवी सोशल मीडिया नेटवर्क वेबसाइटों पर तैरने लगा। ख़बर आई कि एनडीटीवी की 40 फीसद हिस्सेदारी नरेंद्र मोदी के करीबी कारोबारी और स्पाइस जेट के संस्थापक अजय सिंह ने खरीद ली, जिनकी बदौलत भारत को अबकी बार मोदी सरकार जैसा नारा मिला था। हालांकि, शाम होते होते एनडीटीवी ने बीएसई को पत्र लिखकर मामले में अपना पक्ष रखते हुए सभी ख़बरों की हवा निकाल दी। मगर, अभी भी टेलीविजन से जुड़े कुछ सूत्रों का कहना है कि एनडीटीवी के कार्यालय में परिवर्तन होना शुरू हो चुका है। वैसे आग के बिना धुंआं होता नहीं, लेकिन, जब महिला ही गर्भवती न होने की पुष्टि कर दे, तो दूसरे लोगों के शोर मचाने से क्या होगा? ​अब तो बस इंतजार करना होगा, गर्भवती महिला की तरह एनडीटीवी के पेट बाहर आने का। शुक्रवार से ठीक एक दिन पहले सोशल मीडिया पर ऐसी भी चर्चा थी कि एनडीटीवी गुजरात में प्रतिबंधित कर दिया गया है। हालांकि, ऐसा भी कुछ देखने में नहीं मिला। दिलचस्प बात तो यह है कि इस पूरे घटनाक्रम में जी मीडिया के शेयरों को झटका लगा और एनडीटीवी के शेयर बाजार में खूब उछले। मीडिया जगत से एक और ख़बर सामने आ रही है, जो गुजरात से ज...

महात्मा गांधी के एक श्लोक ''अहिंसा परमो धर्म'' ने देश नपुंसक बना दिया!

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जब खुद में लड़ने का दम नहीं था तो गीता के श्लोक को आधा करके लोगों को नपुंसक बना दिया। भारत में अहिंसा के पुजारी का ढोंग करने वाले महात्मा गाँधी ने हिन्दुओं की सभा में हमेशा यही श्लोक पढ़ते थे लेकिन हिन्दुओं को कायर रखने के लिए गांधी इस श्लोक को अधूरा ही पढ़ता था। ऐसी सैंकड़ों बातें आपको इंटरनेट पर तैरती हुई मिल जाएंगी, जब आप ''अहिंसा परमो धर्म:'' श्लोक को कॉपी पेस्ट करके गूगल सर्च में खोजने निकलेंगे। इस साहित्य को लिखने वाले आपको बताएंगे कि ''अहिंसा परमो धर्म'' अधूरा श्लोक है जबकि पूरा श्लोक तो 'अहिंसा परमो धर्मः धर्म हिंसा तथैव च:' है, जिसका अर्थ है कि अहिंसा परम् धर्म है, तो धर्म के लिए हिंसा भी परम् धर्म है। महात्मा गांधी का शरीर तो नत्थू राम गोडसे ने गोलियों से मार डाला। अब गोडसे के अनुयायी की ओर से महात्मा गांधी के विचारों को मारने की कोशिश पुरजोर चल रही है। इसमें कोई दो राय नहीं कि सोशल मीडिया पर कॉपी पेस्ट चलन के कारण उनके सफल होने की संभावनाएं ज्यादा हैं। दिलचस्प बात तो यह है कि नरफत की आबोहवा पैदा करने के लिए लिखने वाले बेहतर जा...

शिव सेना की हालत ऐसी — न तलाक लेते बनता है, न साथ रहते बनता है

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वो समय कुछ और था। जब भाजपा के बड़े बड़े नेता बाला साहेब ठाकरे के सामने जाकर सजदे में खड़े होते थे। अब समय बदल चुका है। अब भारतीय जनता पार्टी खुद नरेंद्र मोदी के गगनचुंबी कद के सामने सिर झुकाए खड़ी हो चुकी है। अगर ऐसे में भी शिव सेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे स्वर्गीय बाला साहेब ठाकरे वाला अदब चाहते हैं, तो उनको बिस्तर पर आराम करना चाहिये, अच्छी नींद लेनी चाहिये और नींद में खूबसूरत ख्वाब देखना चाहिये, क्योंकि हकीकत में ऐसा होना संभव नहीं है। वैसे भी शिव सेना का शुरू से झुकाव नरेंद्र मोदी की ओर कम वरिष्ठ नेता एलके आडवाणी की ओर से अधिक रहा है। शिव सेना के शुरूआती तेवरों से नरेंद्र मोदी समझ गए थे कि उनको अगली पारी कैसे खेलनी है क्योंकि नरेंद्र मोदी और चीजों को भले ही याद न रखें, लेकिन, अपने विरोधियों के साथ निबटना अच्छे से जानते हैं। कभी कभी तो लगता है कि नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनते ही मन की दीवार पर वॉट पुट्टी लगा ली थी, ताकि शिव सेना जैसी विरोधी सहयोगी पार्टी की बारिश का उन पर कोई असर न हो। पिछले तीन साल से शिव सेना और नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाला सरकार के बीच पति पत्नी वाली कह...

मृणाल पांडे : जुमला जयंती पर आनंदित, पुलकित, रोमांचित वैशाखनंदन

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लेखिका और पत्रकार मृणाल पांडे ने ऐसी कोई सी आतिशबाजी छोड़ दी कि मीडिया में कार्यरत लोग, जो कभी उनको पढ़ते रहे हैं या कभी उनके साथ काम करते रहे हैं, तिलमिला उठे हैं और लंबी लंबी पोस्टें लिखने लगे। मृणाल पांडे ने एक ट्विटर पोस्ट ही तो की है। और दिलचस्प बात तो यह है कि इस पोस्ट में किसी का नाम भी नहीं लिया। इस पोस्ट में मृणाल पांडे लिखती हैं, ''जुमला जयंती पर आनंदित, पुलकित, रोमांचित वैशाखनंदन'', और साथ ही एक गधे की फोटो लगाती हैं। #JumlaJayanti पर आनंदित, पुलकित, रोमांचित वैशाखनंदन । pic.twitter.com/eSpNI4dZbx — Mrinal Pande (@MrinalPande1) September 17, 2017 असल में गधे को वैशाखनंदन भी कहा जाता है और गदर्भ भी। जो अति गौर करने वाली बात है, वो यह है कि यह ट्वीट प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर किया गया है। सवाल है कि क्या उस दिन केवल प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिवस ही होता है? हां, कहना शायद मूर्खता होगी। लेकिन, कुछ पढ़े लिखे बुद्धिजीवी मृणाल पांडे के इस ट्वीट पर लंबे लंबे चिट्ठे लिख रहे हैं। उनके व्यक्तित्व और उनकी गरिमा पर उंगली उठा रहे हैं। ...

क्या सच में पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 44 रुपये प्रति लीटर है?

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भारत के कुछ हिस्सों में पेट्रोल की कीमत 80 रुपये के आंकड़े को पार कर गई। पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार की आलोचना हो रही है। लेकिन, सरकार की ओर से कोई ठोस जवाब सामने नहीं आ रहा है। पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सरकार बढ़ती वाहन तेल कीमतों को एक झटके बदल नहीं सकते। इस बीच सोशल मीडिया पर कुछ संदेश वायरल हो रहे हैं, जिनमें कहा जा रहा है कि अगर आपको भारत में बढ़ती पेट्रोल और डीजल कीमतों से दिक्कत है, तो पाकिस्तान चले जाओ, पाकिस्तान में तेल की कीमत 44 रुपये प्रति लीटर है। हालांकि, हर किसी की कीमत अलग अलग हैं। कोई 404 रुपये, तो कोई 26 रुपये तक पेट्रोल की कीमत बता रहा है। लेकिन, क्या सच में पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 40 रुपये प्रति लीटर है? यदि देश के हिसाब से बात करूं तो बिलकुल ऐसा नहीं है। पाकिस्तान में भी पेट्रोल डीजल के भाव 70 रुपये की सीमा के पार चल रहे हैं। 30 अगस्त 2017 को द आॅयल एंड गैस रेगुलेटरी अथाॅरिटी ने पाकिस्तानी पेट्रोलियम मंत्रालय को डीजल पेट्रोल के भाव बढ़ाने की सिफारिश की है। इस सिफारिश पत्र में कहा गया है कि डीजल में 0...

गुजरात बुलेट ट्रेन प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नाम खुला पत्र

प्रिय नरेंद्रभाई दमोदरदास मोदी, मीडिया से दूर, समाचारों से दूर, शांतिमय अच्छे मूड में बैठा था। अपना काम के साथ साथ  फेसबुक पर बीच बीच में एकआध स्टेट्स अपडेट चल रहा था। अचानक पत्नी का काॅल आया कि सभी चैनलों पर आपकी शाही सवारी का खूबसूरत नजारा चल रहा है। मैंने आॅन किया, तो देखा कि आप और जापान के प्रधान मंत्री अबे शिन्जो खुली जीप में सवार होकर रिवरफ्रंट के किनारे टहल रहे हैं। टेलीविजन की स्क्रीन पर जापान प्रधानमंत्री अबे शिन्जो के साथ आपका रौब देखते ही बन रहा था। एक चाय वाले का ठाठ, वाह वाह, क्या कहने, जो इस समय देश का प्रधान सेवक है। आपकी आपकी बोली में कहूं तो चैंकीदार। आपके आगमन पर शहर की टूटी फूटी सड़कों को एकदम चकाचक कर दिया है, मझाल है कि पानी के गिलास से एक बूंद पानी छलककर नीचे गिर जाए। लेकिन, यह उतने क्षेत्र में ही हुआ, जहां जहां से आपकी राजशाही सवारी को गुजरना था। बाकी शहर के लिए तो भाजपा के संकट मोचन अमित शाह कह कर गए हैं कि बारिश के कारण सड़कों की मुरम्मत करना मुश्किल होता है। इसलिए बारिश का मौसम गुजर जाए तो काम चालू हो जाएंगे। जैसे ही आपके आने का समाचार तंत्र...

अगर रवीश कुमार ने पीएम को गुंडा नहीं कहा तो सवाल है कि....?

बड़े दिनों से ब्लॉग जगत से दूर हूं। आज एक बार फिर से ब्लॉग जगत की दुनिया में लौटने का मन हुआ। ख़बर आयी कि एनडीटीवी के वरिष्ठ संवाददाता और न्यूज एंकर रवीश कुमार ने देश के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को गुंडा शब्द से संबोधन किया। मैंने भी रवीश कुमार के बयान 'मुझे दुख है कि मोदी जैसा गुंडा मेरा पीएम है : रवीश कुमार' के बयान की फेसबुक पर निंदा की। होनी भी चाहिये, क्योंकि यह पत्रकारिता की शालीनता नहीं है और ऐसे बयान पत्रकारिता की ​गरिमा को चोट पहुंचते हैं। मगर, बाद में पता चला है कि ऐसा कोई भी बयान संवाददाता रवीश कुमार ने नहीं दिया। जो बयान सोशल मीडिया और मीडिया जगत में वायरल हो रहा है, दरअसल वो बयान फर्जी है। इससे भी मजेदार सवाल तो यह है कि ​यदि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रवीश कुमार ने गुंडा नहीं कहा, तो कौन है वह जो रवीश कुमार के कंधे पर बंदूक रखकर नरेंद्र मोदी पर निशाना साध रहा है। अपने मन की भड़ास निकाल रहा है और उसके समर्थन में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रशंसक की खड़े हुए जा रहे हैं। रवीश कुमार के मुंह से क्यों? यदि कुछ कहना ही है तो अपने मुंह से ​क...

70 साल की लूट, गलती से ही सही, कहीं सच तो नहीं बोल रहे नरेंद्र मोदी

आप कैशलेस को पूरे देश पर थोपना चाहते हैं। आप कैशलेस का आह्वान करते तो समझ में आता। प्रेम में प्रस्‍ताव रखे जाते हैं, और जबरी संबंधों में सबकुछ थोपा जाता है। आप कह रहे हैं कि तकनीक का जमाना है, सब कुछ ऑनलाइन हो सकता है, अब लेन देन भी ऑनलाइन करो। मैं सहमत हूँ, लेकिन एक फोकट का सवाल है , जब तकनीक का जमाना है, जब हम सब कुछ ऑनलाइन कर सकते हैं तो आपकी रैली ऑफलाइन क्यों? मेरे झोले में फोकट की सलाह भी है - क्यों ना आप भी रैली भाषण का वीडियो रिकॉर्ड करके यूट्यूब पर डालें, और महसूस करें कि पूरा इंडिया इसको सुन रहा है, देख रहा है, और गर्व महसूस कर रहा है। इससे कथित 4 करोड़ प्रति रैली खर्च बच सकता है, आपकी जान को भी कोई खतरा नहीं होगा, आपकी रक्षा के लिए रैली के बाहर खड़ी होने वाली पुलिस अपने रोजमर्रा के काम निबटा पाएगी। कड़वी दवा तो नहीं कड़वा सच - जो आप जानते हैं। आपके पीआर जानते हैं कि मोबाइल अभी घर घर की जरूरत है लेकिन इंटरनेट नहीं। आपको पता है कि जो भीड़ रैली में होती है, वो वंचित है उन सुविधाओं से जिसने आपके समर्थक लैस हैं। उस भीड़ में किसी के पास डेटा पैक के पैसे नहीं, तो किसी के पास नेट...

कहो..... भीड़ नहीं हम.....

आस पास के लोगों से..... सतर्क हो जाइए..... क्‍योंकि पता नहीं कौन सा नकाबपोश..... काले धन का मालिक हो..... मखौटों के इस दौर में सब फर्जी हैं..... हां..... मैं..... आप..... हम सब फर्जी हैं। चौंकिए मत..... सच है.....। कबूतर की तरह आंखें भींचने से क्‍या होगा?.....। याद कीजिए..... 35 लाख का घर..... और 22 लाख के दस्‍तावेज..... आखिर किसने बनवाये। बेरोजगार बेटे बेटी को 3 से 5 लाख रिश्‍वत देकर..... सरकारी नौकरी किसी ने दिलवाई.....। आखिर कौन पूछता है..... दामाद ऊपर से कितना कमा लेता है.....। ऐसे ही तो..... जमा होता है काला धन..... काले धन वाले भी..... तो शामिल हैं ईमानदारों में..... और नोटबंदी का करते हैं जमकर समर्थन..... कहते हैं..... मिट जाएगा काला धन..... और खत्‍म होगी रिश्‍वतखोरी..... हां..... स्‍लीपर सैल की तरह..... हम में भी..... कहीं न कहीं..... छुपे बैठे हैं चोर..... दम है तो पकड़िये..... रिश्‍वत लेते..... जो पकड़ा गया..... रिश्‍वत देकर छूट जाएगा..... सड़क पर ट्रैफिक वाला रसीद काटता है..... तो आप बड़े आदमी को फोन लगा लेते हैं..... ईमानदार कर्मचारी की बैंड खूब बजती है..... और तमाश द...

और तो कुछ पता नहीं, लेकिन लोकतंत्र ख़तरे में है

जहां लोकतंत्र में सत्‍ता और विपक्ष रेल की पटरी सा होता है। तो वहीं, लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था एक रेल सी होती है। यदि दोनों पटरियों में असंतुलन आ जाए तो पटना इंदौर एक्‍सप्रेस सा हादसा होते देर नहीं लगती, सैंकड़ों जिंदगियां पल भर में खत्‍म हो जाती हैं। और पीछे छोड़ जाती हैं अफसोस कि काश! संकेतों पर गौर कर लिया होता। वक्‍त रहते कदम उठा लिये गए होते। ये संकेत नहीं तो क्‍या हैं कि देश सिर्फ एक व्‍यक्‍ति पर निर्भर होता जा रहा है। देश में विपक्ष की कोई अहमियत नहीं रह गई। सत्‍ता पक्ष के खिलाफ बोलना अब देशद्रोह माना जाने लगा है। किसी सरकारी नीति की आलोचना करने का साहस करने पर आपको बुरा भला कहा जाता है। दिलचस्थ तथ्‍य तो देखो कि भारत बंद की घोषणा होने के साथ ही सत्‍ता पक्ष की तरफ से कुछ दुकानों पर एक सरीखे नारे लिखे बोर्ड या बैनर टांग दिये जाते हैं। हर आदमी के गले में कड़वी बात को उतारने के लिए सेना और देशभक्‍ति का शहद की तरह इस्‍तेमाल किया जा रहा है, ताकि कड़वाहट महसूस न हो। पहले तो ऐसा नहीं होता था, सरकार के खिलाफ भारत बंद भी होते थे। जो लोग आज सत्‍ता में हैं, वो ही लोग लठ लेकर निकला करते थे...

'अकीरा' फिल्‍म नहीं, कहानी है एक 'लड़की' के साहस की

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अकीरा फिल्‍म नहीं, एक कहानी है, एक दस्‍तां है, एक लड़की के साहस की, जोश की, हिम्‍मत की, संघर्ष की और बलिदान की, जो हमको सिल्‍वर स्‍क्रीन पर सुनाई जाती है। अकीरा सी लड़की पैदा करना हर मां बाप के बस की बात नहीं, ऐसी लड़की को ईश्‍वर किसी किसी को वरदान स्‍वरूप देता है। अकीरा खूबसूरत है। अकीरा भी आम लड़कियों जैसी है। मगर, एक बात उसको अलग बनाती है, उसके भीतर की हिम्‍मत। फिल्‍म की शुरूआत में ही एक सूफी कहावत का जिक्र है, जिसमें फिल्‍म का पूरा निचोड़ है। ईश्‍वर आपके उस गुण की परीक्षा लेता है, जो आप में मौजूद है। 'अकीरा' की परीक्षा तो दस साल की उम्र से शुरू हो जाती है, जब अकीरा बस स्‍टैंड पर बदतमीजियां कर रहे लड़कों को निपटा देती है। अकीरा की शक्‍ति उसके पिता है, जैसे नीरजा में नीरजा की शक्‍ति उसके पिता थे। अकीरा 3 साल बाल सुधार गृह में गुजारने के बाद खूबसूरत जीवन जीने लगती है। तभी किस्‍मत अकीरा के जीवन में मुम्‍बई जाना लिख देती है। कहते हैं ना जब पाप हद से ज्‍यादा बढ़ जाए तो पापियों का विनाश करने को एक परम-आत्‍मा जन्‍म लेती है। कुछ ऐसा ही अकीरा के बारे में कह सकते हैं, जब अक...

हलके गुलाबी कुर्ते वाले प्रधानमंत्री और जियो डिजीटल लाइफ

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'मन की बात' कहने वाले हमारे माननीय प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी आज सुबह सुबह आपका तस्‍वीर अखबारों के पहले पृष्‍ठ पर देखा। टचवुड नजर न लग जाए। हलके गुलाबी कुर्ते पर ब्‍लू रंग की मोदी जैकेट जंच रही है, खिला हुआ चेहरा तो मशाल्‍लाह है। मगर, एक बात खटक गई। बड़ा रोका मैंने खुद को कि चल छोड़ो जाने दो। मगर, मन की बात कहां दबी रहती है जुबां पर आ ही जाती है। मुझे समझ नहीं आया कि जियो डिजीटल लाइफ क्‍या है, जिसका आप चेहरा बने हैं इस विज्ञापन में। क्‍या जियो डिजीटल आइडिया एयरटेल वोडाफोन टाटा डोकोमो श्रेणी में नहीं आती ? यदि आती है तो फिर क्‍यों आप ने बीएसएनएल का प्रचार करने की बजाय जियो डिजीटल पर फोटो लगाने की अनुमति दी। हमारा बीएसएनएल मर रहा है। दम तोड़ रहा है। ऐसे हालात में आपका फोटो जियो डिजीटल लाइफ के साथ प्रकाशित होता है। मन दुखी होने लगता है। आप से कोई सवाल नहीं करेगा, क्‍योंकि आप देश के प्रधान मंत्री हैं। टेलीकॉम कंपनियों में कोई अजय देवगन जैसा बिंदास आदमी नहीं है, वरना किसी सहयोगी से आपको फोन लगवाकर पूछ लेता कि साहेब हमने आपका का क्‍या बिगाड़ा है, जो हमको पछाड़ने के लिए...

राम की रामायण होती है, किंतु रावण की रामायण नहीं हो सकती

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आज सुबह दिल्‍ली के एक समाचार पत्र को देखते हुए एक विज्ञापन पर नजर गई। विज्ञापन एक नाटक के संदर्भ में था, जिसमें पुनीत इस्‍सर रावण के रूप में अभिनय कर रहे हैं। इस नाटक को निर्देशित और कलमबद्ध अतुल सत्‍य कौशिक ने किया है। इस नाटक का नाम रावण की रामायण। हालांकि, राम की रामायण होती है, किंतु रावण की रामायण नहीं हो सकती। पूछो क्‍यों? जब सूर्य उत्‍तर दिशा की तरफ सरकने लगता है तो उस समय स्‍थिति को उत्‍तरायण कहा जाता है क्‍योंकि उस समय सूरज का उत्‍तर दिशा की तरफ बढ़ता है। डॉ. विद्यानिवास मिश्र का एक संदर्भ लेते हुए बात करूं तो अयन के दो अर्थ हैं - 'घर' भी है और 'चलना' भी है। बिलकुल सही और स्‍टीक हैं। रामायण देखा जाए तो पूर्ण रूप से राम का घर है और यात्रा भी है, चलना भी यात्रा से जोड़ा जा सकता है। राम कथा को रामायण इसलिए कहा जाता है क्‍योंकि उसमें पूर्ण राम समाए हैं। रामायण का अर्थ कहानी या दास्‍तां नहीं होता। हालांकि, लोग आप बोल चाल की भाषा में कहते जरूर हैं कि तेरी रामायण बंद कर। इसलिए रावण की रावणायण तो सकती है। मगर, रावण की रामायण होना मुश्‍किल है। इस शब्‍द को...

...लो बूटी और बेस हमारे गीतों में शामिल हो गए

आज कल ट्विटर पर बीट पे बूटी चैलेंज चल रहा है। बहुत सारे लोग बीट पे बूटी चैलेंज एक दूसरे को आगे बढ़ा रहे हैं। बड़ी अजीब बात है कि आजकल "बेस" और "बूटी" आम सी बात होगी, जैसे मेरी तो फट गई। यह हमारी भाषा तो नहीं, ये तो रोड़ किनारे खड़े, टी स्‍टॉल पर खड़े, टपोरी लोगों की भाषा है। मगर, हमको आज कल 'बीट पे बूटी' और 'बेबी को बेस पसंद है' ही अच्‍छा लगने लगा है या यो यो हनी सिंह '* में दम है तो बंद कर लो'। बड़ा अजीब लगता है, कोई कहता है कि मेरी तो फटती है, चाहे लड़का हो चाहे लड़की। जब उनसे फटती का अर्थ पूछो तो जुबां पर लगाम लग जाती है। क्‍या यह नहीं कह सकते ? मुझे डर लगता है। मैं डर गया। मैं डर गई। मैं घबरा गई। मेरे तो हाथों के तोते उड़ गए। तेरे तो पसीने छूट रहे हैं। बूटी का हिन्‍दीकरण पिछवाड़ा हालांकि उर्दूकरण थोड़ा सा सलीके वाला है, तरशीफ। इस गीत में जैकलीन फर्नांडीज ने जमकर बूटी थिरकाई है। जैकलीन फर्नांडीज श्रीलंकाई हैं। आप जैकलीन फर्नांडीज के जितने गाने देखेंगे, आपको बूटी के सिवाय शायद ही कोई अन्‍य मूवमेंट नजर आए। ए फलाइंग जट्ट का गाना भी शायद...

सावधान! पीवी सिंधू

प्रिय पीवी सिंधु, बधाई हो तुम्‍हें, शानदार प्रदर्शन और रजत हासिल करने की। 19 अगस्‍त 2016 की रात भारतीयों ने तुमको खूब सारी बधाईयां दी क्‍योंकि तुमने अपने बेहतरीन प्रदर्शन से चांदी जो जीती, हालांकि, हम सोने तक नहीं पहुंच सके। कोई बात नहीं, फिर भी तुम दिल जीतने में कामयाब रही। तुम भाग्‍यशाली हो कि हार के बावजूद तुम्‍हारे साथ भारतीय क्रिकेटरों सा व्‍यवहार नहीं हुआ, बल्‍कि तुम्‍हारी हार को भी सकारात्‍मक रूप से लिया गया। इस बात से अधिक खुश मत होना। हम भारतीय हैं, भीड़ में चलते हैं। हमसे से कुछ ऐसे भी हैं, जो खाली हाथों से तालियां जरूर बजा रहे हैं, मगर जेबें पत्‍थरों से भरे हुए हैं। तुमको याद होगा, युवराज सिंह, भारतीय युवा क्रिकेटर। उसके छह छक्‍के आज तक लोगों के जेहन में जिन्‍दा हैं। रातों रात हीरो बन गया। हर कोई युवराज सिंह बनने की होड़ में दिखने लगा। अचानक जिन्‍दगी ने दांव पलटा। वो ही युवराज सिंह आंख की किरकिरी बन गया। खेल प्रदर्शन में चूकने लगा तो लोगों ने उसके घरों पर पत्‍थर बरसा दिए। ये वो ही लोग थे, जो युवराज को सर आंखों पर बिठाए हुए थे। भारतीयों का सम्‍मान और प्‍यार बड़ा अ...

मुसीबत! फिल्‍मों में बढ़ता चुम्‍बन चलन

पिछले दिनों ड्राइव इन सिनेमा में मोहनजो दरो देखने गए। शादीशुदा आदमी बहुत कम अकेले जाता है, जब भी जाता है परिवार सहित जाता है। सवाल परिवार के साथ जाने या न जाने का तो बिलकुल नहीं। सवाल है कि आप अचानक फिल्‍म देखते देखते असहज हो जाते हो। हालांकि, चुम्‍बन करना बुरा नहीं। मगर, इस तरह चुम्‍बन को बढ़ावा देने उचित भी नहीं, जब सिनेमा घर में परिवार सहित बच्‍चे भी आए हों, जिनको कुछ भी पता नहीं होता। मेरी छह साल की बच्‍ची है, सिनेमा घर हो या टेलीविजन की स्‍क्रीन, लड़का लड़की के बीच रोमांटिक सीन उसको बिलकुल नहीं अच्‍छे लगते। वो अपना ध्‍यान इधर उधर भटकाने पर लग जाती है। उसको अन्‍य बच्‍चों की तरह डॉरेमन जैसे कार्टून देखने अच्‍छे लगते हैं, जो शायद एक तरह से अच्‍छा भी है। कार्टून चैनलों पर अभी इतना फूहड़ता नहीं आई है। मोहनजो दरो में एक चुम्‍बन दृश्‍य है, जो काफी बेहतरीन है। मगर, आपको असहज बना देता है क्‍योंकि जब फिल्‍म पूरी तरह सामाजिक सीमाओं में बंधकर चल रही हो और अचानक यूं दृश्‍य आ जाए। अब इसका चलन दिन प्रति दिन बढ़ता चला जाएगा। बड़े बैनर भी अब चुम्‍बन बाजी पर ध्‍यान दे रहे हैं। आदित्‍य चोपड़ा ...

अगर नहीं देखी तो 'बोल' देखिए

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कुछ दिन पहले पाकिस्‍तानी फिल्‍म बोल देखने को मिली, जो वर्ष 2011 में रिलीज हूई थी, जिसका निर्देशन शोएब मंसूर ने किया था। एक शानदार फिल्‍म, जो कई विषयों को एक साथ उजागर करती है, और हर कड़ी एक दूसरे से बेहतरीन तरीके से जोड़ी है। कहानी एक लड़की की है, जो अपने पिता के कत्‍ल केस में फांसी के तख्‍ते पर लटकने वाली है। एक लड़के के कहने पर लड़की फांसी का फंदा चूमने से पहले अपनी कहानी कहने के लिए राष्‍ट्रपति से निवेदन करती है। राष्‍ट्रपति उस लड़की के निवेदन को स्‍वीकार करते हैं और वे लड़की अपनी मीडिया से कहानी कहती है। लड़की के पिता हकीम हैं, जिनका धंधा दिन प्रति दिन डूब रहा है, और हकीम साहेब बेटे की चाह में बेटियां ही बेटियां पैदा किए जा रहे हैं। अंत उनके घर एक बच्‍चे का जन्‍म होता है, जो लड़की है न लड़का। किन्‍नर संतान से हकीम नफरत करने लगते हैं। लेकिन परिवार के अन्‍य सदस्‍य किन्‍नर को आम बच्‍चों की तरह पालने कोशिश में लग जाते हैं। सालों से घर की चारदीवारी में बंद किन्‍नर बाहरी दुनिया से अवगत हो, खुशी से जीवन जीए, यह सोचकर उसको बाहर भेजा जाता है, मगर, कुछ हवस के भूखे लोगों की निगाह में...