एक सिक्के के दो पहलू
आज सुबह सुबह मनोदशा कुछ अच्छी न
हीं थी, मन एक बना रहा था तो एक ढहा रहा था। तबी मेरे दोस्त जनक सिंह झाला ने एक तस्वीर दिखाई, जो उसने पिछले दिनों लिए अपने नए कैमरे से खींची। इस तस्वीर को देखने के बाद मुझे एक ख्याल आया वो ये कि ये तस्वीर नहीं, जिन्दगी का एक खरा सच है। इसी लिए मैंने को इस नाम से पुकारा-'एक सिक्के के दो पहलू'। अगर इस महिला को जिन्दगी मान लिया जाए तो दुख-सुख इसके दो पहलू हैं, जैसा कि इस तस्वीर में मुझे दिखाई पड़ता है। शायद आगे दौड़ रहा बच्चा सुख है और पीछे चल रहा दुख । अगर इस तस्वीर को मेरी नजर से देखें तो पीछे दो अक्षर लिखे हुए नजर आ रहे हैं, पीछे वाले बच्चे के पास 'T' एवं अगले वाले बच्चे के पास 'E'। 'T' बोले तो Tension एवं 'E' बोले तो Enjoyment। और तस्वीर में मिलती जुलती स्थिति । हम सबको बनाने वाला तो एक है, लेकिन हमारी स्थिति इन दोनों बच्चों सी है, कोई ज्यादा खुश तो कोई ज्यादा दुखी। दीवार फिल्म के अमिताभ बच्चन एवं शशि कपूर, जन्म तो एक मां ने दिया, लेकिन किस्मत दोनों की जुदा जुदा, जैसे मेरी और मेरे भाई की। जिन्दगी भी ऐसे ही चलती है, कभी पीछे वाले की तरह तो कभी आगे वाले की तरह। इस औरत को मैंने जिन्दगी के रूप में देखा, जिसके आगे खुशी और पीछे दुख चलता मुझे नजर आ रहा है, इसके बीच फँसी है जिन्दगी। आप क्या सोचते हैं, इस तस्वीर को देखने के बाद एक जरूर लिखना।
आप तो कवि हो गए भाई
जवाब देंहटाएंचित्रों में ही ढूंढ निकाली कविता
भावनाएं नई नई उपमायें
जिंदगी सुख दुख की परिभाषाएं
चित्रों में तलाशना
एक नई विधा हो गई यह तो
बधाई।
जिंदगी की डोर पर कभी-कभी ऐसा दिख जाता है जो हम देखना चाहते हैं और हां सही मायने में कहें तो जिंदगी के ये दो पहलू ही हैं।
जवाब देंहटाएंबच्चे अपना भविष्य खुद तय करेंगे..चित्र ढ़ेरों विचार देता है.
जवाब देंहटाएं