कांग्रेस को लेकर मीडिया की नीयत में खोट, निष्पक्ष पत्रकारिता नहीं
मीडिया की अपनी सोच कर चुकी है। वो अब सोशल मीडिया को केंद्र में रखकर ख़बरें बनाने लगा है। हालांकि इसका असर प्रिंट मीडिया पर नहीं, बल्कि वेब मीडिया एवं इलेक्ट्रोनिक मीडिया पर अधिक दिखता है। कांग्रेस का विज्ञापन शुरू हुआ तो नमो के चेलों ने लड़की हसीबा अमीन को लेकर दुष्प्रचार करना शुरू कर दिया। वेब मीडिया भी उसी धुन में निकल पड़ा। हालांकि विज्ञापन में स्पष्ट शब्दों में लिखा है, युवा कांग्रेस कार्यकर्ता। जो लोगों को गला फाड़कर बताने की जरूरत कहां रह जाती है, हां अगर कोई अभिनेत्री होती, स्वयं को कांग्रेस कार्यकर्ता कहती तो समझ में आता गला फाड़ना। अगर अमेरिकन होती तो समझ में आता गला फाड़ना। नंबर दो बात, राहुल गांधी की इंटरव्यू के बाद जो मीडिया ने समझ बनाई, वो भी हैरानीजनक है। उसका इंटरव्यू इतना बुरा नहीं था, सच तो यह है कि अर्नब गोस्वामी राहुल गांधी को सुनना नहीं चाहता था, वे तो केवल उसके गले में उंगली डालकर उलटी करवाना चाहता था, ताकि नरेंद्र मोदी के गले से भी आवाज निकल आए। राहुल गांधी की इंटरव्यूह पर सवाल उठाने वाले नरेंद्र मोदी का इंटरव्यू क्यूं याद नहीं कर ...